फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) का इलाज

हड्डियों को मजबूत कैसे बनाएं
September 22, 2019

फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) का इलाज


फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) का इलाज

हड्डी फ्रैक्चर का इलाज आमतौर पर यह सोच के लिया जाता है की हड्डी जुड़ने के बाद आप आसानी से फिर से पहले जैसे सारे कार्य कर पाएं। बोन हीलिंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो समय के साथ खुद ही ठीक होती है।

टूटी हुई हड्डी को जोड़ने के लिए कई तरह से उपचार किया जाता है जिसमें शामिल है-

इमोबिलाइजेशन – इमोबिलाइजेशन की प्रक्रिया में टूटी हुई हड्डी को जोड़ा जाता है और कोशिश की जाती है की ठीक होने तक हड्डी वैसी ही सीधी रहे इसके लिए कुछ उपाय अपनाये जाते है, जैसे-

प्लास्टर कास्ट या प्लास्टिक फंक्शनल ब्रेसिज़ – इस प्रक्रिया में हड्डी को ऐसे जोड़ा जाता है की यह प्लास्टर हड्डी को तब तक पकड़ के रखता हैं जब तक हड्डी जुड़ नहीं जाती है।

मेटल प्लेट्स और स्क्रू – इस प्रक्रिया में टूटी हुई हड्डी को मेटल प्लेट्स और स्क्रू के द्वारा सहारा देकर जोड़ा जाता है।

इंट्रा-मेडुलरी नेल्स – इस प्रक्रिया में आंतरिक मेटल की रॉड को लंबी हड्डियों के केंद्र के नीचे रखा जाता है। इस प्रक्रिया के तहत बच्चों में लचीले तारों का उपयोग किया जा सकता है।

एक्सटर्नल फिक्सेटर – यह फिक्सेटर मेटल और कार्बन फाइबर से बने होते है और इसमें स्टील की पिन लगी होती है जो सीधे त्वचा के द्वारा हड्डी में जाती है और फिक्स हो जाती है। वैसे तो टूटी हुई हड्डी को इमोबिलाइजेशन से स्थिर होने के लिए 2-8 सप्ताह लगता है, पर यह समय इस बात पर निर्भर करता है की किस जगह की हड्डी फ्रैक्चर हुई है और कहीं कोई जटिलता जैसे रक्त की पूर्ति करने में परेशानी या किसी तरह का संक्रमण तो उत्पन्न नहीं हो रहा है।

हीलिंग – यदि टूटी हुई हड्डी को ठीक तरह से जोड़ दिया जाता है और उसे स्थिर रखा गया है तो हीलिंग की प्रक्रिया अपने आप होने लगती है। रोगी की उम्र, हड्डी किस प्रकार प्रभावित हुई है, फ्रैक्चर के प्रकार, और रोगी का सामान्य स्वास्थ्य यह सभी कारक हैं जो यह बताते है कि हड्डी कितनी तेजी से ठीक हो रही है। यदि रोगी नियमित रूप से धूम्रपान करता है, तो उपचार प्रक्रिया में अधिक समय लगता है।

फिजिकल थेरेपी – हीलिंग की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद हड्डी के ठीक हो जाने पर मांसपेशियों की ताकत और साथ ही प्रभावित क्षेत्र की गतिशीलता को बढ़ाना बहुत ही जरुरी है। क्योकि यदि फ्रैक्चर जॉइंट के पास या जॉइंट के द्वारा हुआ है तो आपको भविष्य में आर्थराइटिस या हड्डी के कठोर होने की समस्या हो सकती है।

सर्जरी – अगर टूटी हुई हड्डी के आसपास के सॉफ्ट टिश्यू और स्किन भी प्रभावित हुए है तो उसको ठीक करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है।

देर से ठीक होने वाले फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए आप कुछ तरीके अपना सकते है जैसे-

बोन ग्राफ्टिंग – यदि फ्रैक्चर ठीक होने में बहुत लम्बा समय लग रहा है और या फ्रैक्चर ठीक ही नहीं हो रहा है तो इस स्थिति में बोन ग्राफ्टिंग की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है जिसमे प्राकृतिक हड्डी या आर्टिफीसियल हड्डी को टूटी हुई हड्डी से ट्रांसप्लांट किया जाता हैं।

स्टेम सेल थेरेपी – इस प्रक्रिया को करने के लिए अभी शोध जारी है की क्या स्टेम सेल थेरेपी के द्वारा टूटी हड्डियों को जोड़ा जा सकता है।

Comments are closed.